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चंदन स्टील के विस्तार प्लान से गुजरात में आर्थिक उछाल या पर्यावरणीय खतरा? Umargam में 72,000 टन स्टेनलेस स्टील उत्पादन बढ़ाने की योजना

गुजरात के वलसाड जिले के उमरगाम GIDC में स्थित चंदन स्टील लिमिटेड (यूनिट-1) ने अपने सेकेंडरी मेटलर्जिकल स्टेनलेस स्टील बिलेट्स प्लांट के विस्तार के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट तैयार की है। इस योजना के तहत कंपनी का वार्षिक उत्पादन 60,000 टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 72,000 टन प्रति वर्ष किया जाना है। इस परियोजना की कुल लागत ₹82 करोड़ है और इसे केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की मंज़ूरी की ज़रूरत है, क्योंकि यह गुजरात-महाराष्ट्र की अंतर्राज्यीय सीमा के 5 किमी के भीतर आता है। इस विस्तार से आर्थिक लाभ तो मिलेगा ही, लेकिन पर्यावरणीय चिंताएँ भी बढ़ सकती हैं। आइए जानते हैं इस प्लान के अच्छे और बुरे पहलुओं के बारे में।

परियोजना की मुख्य जानकारी

चंदन स्टील का प्लांट प्लॉट नंबर 32, 33B, 34, 35 और 36 पर 17,012 वर्ग मीटर (1.7012 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैला हुआ है। विस्तार के बाद उत्पादन में 12,000 टन की वृद्धि होगी, जिसमें स्टेनलेस स्टील बिलेट्स (इंगॉट्स) का मुख्य उत्पादन है। कंपनी के पास वर्तमान में पर्यावरणीय मंज़ूरी है और विस्तार के लिए इको केम सेल्स एंड सर्विसेज़ द्वारा EIA अध्ययन दिसंबर 2023 से फरवरी 2024 के दौरान किया गया है।

परियोजना की लागत में ₹7.93 करोड़ पर्यावरण प्रबंधन के लिए आवंटित किए गए हैं, जिसमें वायु, जल और कचरा नियंत्रण के उपाय शामिल हैं।

प्लांट के आस-पास के क्षेत्र में कोई राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य या पुरातात्विक स्थल नहीं है। तुम्ब नदी 3.96 किमी दूर और अरब सागर 4.41 किमी दूर हैं। पानी की ज़रूरत 260 किलोलीटर प्रतिदिन GIDC से पूरी की जाएगी, जबकि बिजली दक्षिण गुजरात बिजली कंपनी लिमिटेड (DGVCL) से मिलेगी। भूमि उपयोग में 25% क्षेत्र (4,253 वर्ग मीटर) ग्रीनबेल्ट के लिए रखा गया है।

अच्छे पहलू: आर्थिक विकास और औद्योगिक प्रगति

रोज़गार और आर्थिक वृद्धि: विस्तार से स्थानीय क्षेत्र में नए रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। कंपनी वर्तमान में 60,000 टन का उत्पादन करती है और विस्तार के बाद यह गुजरात के स्टील उद्योग को मज़बूत करेगा। इससे स्थानीय व्यापारियों, परिवहन और सप्लाई चेन को फायदा होगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग: GIDC जैसे औद्योगिक क्षेत्र में विस्तार होने से सड़कों (SH-73 से 0.20 किमी), रेलवे स्टेशन (उमरगाम से 1.81 किमी) और बिजली-पानी की सुविधाओं का प्रभावी उपयोग होगा। कंपनी की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस विस्तार से कोई नई ज़मीन परिवर्तित करने की ज़रूरत नहीं है, जो पर्यावरणीय दृष्टि से भी अच्छा है।

पर्यावरण प्रबंधन: रिपोर्ट में वायु और ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए ग्रीनबेल्ट, एयर पॉल्यूशन कंट्रोल मेज़र्स (APCM) और अपशिष्ट प्रबंधन की योजनाएँ हैं। बेसलाइन अध्ययन में आस-पास के क्षेत्र में पर्यावरणीय गुणवत्ता सामान्य सीमा में पाई गई है, जो कंपनी के प्रयासों को दर्शाती है।

बुरे पहलू: पर्यावरणीय और स्थानीय चिंताएँ

  1. प्रदूषण का जोखिम: मेटलर्जिकल प्लांट में विस्तार से वायु, जल और भूमि प्रदूषण बढ़ सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्तमान में पानी की ज़रूरत 240 KL/दिन है, जो विस्तार के बाद 260 KL/दिन होगी। हालाँकि, औद्योगिक अपशिष्ट और खतरनाक कचरे (जैसे स्लैग) का प्रबंधन अगर उचित ढंग से न किया गया तो तुम्ब नदी और अरब सागर पर असर पड़ सकता है
  2. अंतर्राज्यीय और स्थानीय प्रभाव: प्लांट महाराष्ट्र सीमा से केवल 2.96 किमी दूर है, जिसके कारण प्रदूषण के अंतर्राज्यीय प्रभाव की चिंता है। आस-पास के गाँव जैसे उमरगाम (1.70 किमी) में ध्वनि और धूल का प्रदूषण बढ़ सकता है, जो स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
  3. संसाधनों का अधिक उपयोग: बिजली की मांग 10,850 kVA से बढ़कर 13,350 kVA हो जाएगी, जो ऊर्जा संसाधनों पर दबाव बढ़ाएगा। रिपोर्ट में बेसलाइन अध्ययन है, लेकिन लंबी अवधि के प्रभावों के बारे में अधिक विवरण की आवश्यकता है, जैसे जलस्तर में कमी या भूमि की गुणवत्ता पर असर।

इस विस्तार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की मंज़ूरी मिलने पर यह गुजरात के औद्योगिक विकास को गति देगा, लेकिन स्थानीय और पर्यावरणीय संगठनों को इसकी निगरानी की ज़रूरत है। कंपनी के प्रतिनिधि गौरीशंकर ने कहा, “हम पर्यावरणीय मानदंडों का सख्ती से पालन करेंगे।” हालाँकि, विरोधी मानते हैं कि ऐसे प्रोजेक्ट्स से स्थानीय इकोसिस्टम को खतरा है। अधिक जानकारी के लिए कंपनी की रिपोर्ट का अवलोकन किया जा सकता है।

(स्रोत: चंदन स्टील की EIA रिपोर्ट, दिसंबर 2023-फरवरी 2024. यह विश्लेषण रिपोर्ट की जानकारी पर आधारित है और इसमें व्यक्तिगत राय शामिल नहीं है।)

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