Wednesday, February 18News That You Want to Read

वापी में गूंजे पंजाबी लोकगीत, महिलाओं ने मनाया ‘तीयाँ दा मेला’, गिद्धा और स्टॉल्स से दिखा महिला सशक्तिकरण

वापी पंजाबी चैरिटेबल फाउंडेशन ने किया पारंपरिक ‘तीयाँ दा मेला’ का सफल आयोजन।

वापी पंजाबी चैरिटेबल फाउंडेशन ने 2 अगस्त, शनिवार को पंजाब भवन, चणोद में ‘तीयाँ दा मेला’ का भव्य आयोजन किया। यह आयोजन पंजाब की पारंपरिक संस्कृति और त्यौहारों को जीवित रखने के उद्देश्य से किया गया था, खास कर उन महिलाओं के लिए जो अपनी जन्मभूमि से दूर, गुजरात में अपना जीवन बिता रही हैं।

सावन के महीने में मनाया जाने वाला यह ‘तीयाँ दा मेला’ महिलाओं का एक खास त्योहार है। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक पंजाबी परिधान पहनकर एक-दूसरे से मुलाकात की, खुशी और उल्लास के साथ गिद्धा नृत्य किया और पारंपरिक लोकगीत गाए। मेले में झूले भी लगाए गए थे, जो इस त्योहार का एक अभिन्न अंग है। महिलाओं के लिए यह मौका अपने मायके की यादें ताज़ा करने और एक-दूसरे के साथ समय बिताने का एक सुनहरा अवसर रहा।

इस वर्ष के आयोजन का मुख्य आकर्षण महिला सशक्तिकरण रहा। फाउंडेशन ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए खास स्टॉल्स का प्रबंध किया। इन स्टॉल्स पर महिलाओं ने अपने हाथों से बनाए गए व्यंजन, हस्तशिल्प और अन्य वस्तुएं बेचीं। इससे न सिर्फ उन्हें अपने हुनर को प्रदर्शित करने का मौका मिला, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने की दिशा में भी एक कदम बढ़ाने का अवसर मिला।

वापी पंजाबी चैरिटेबल फाउंडेशन की सदस्या, जसविंदर गाबा ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य पंजाब की संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना और उसे जीवंत रखना है। उन्होंने कहा, “हम अपनी जन्मभूमि से दूर हैं, लेकिन हमारी संस्कृति को अपनी कर्मभूमि में भी जीवित रखना चाहते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि इस मेले में वापी, सिलवास, दमन और वलसाड से 150 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया और इसे सफल बनाया।

फाउंडेशन ने सभी प्रतिभागियों और मेहमानों का धन्यवाद किया, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से इस रंग-बिरंगे और सांस्कृतिक आयोजन को यादगार बना दिया। ‘तीयाँ दा मेला’ सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि हर महिला के सम्मान और पंजाब की गौरवशाली परंपराओं को संजोने का प्रतीक बन गया है।

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