आजकल कुछ लोग खुद को पत्रकारिता का ‘मसीहा’ समझते हुए दूसरों पर कीचड़ उछालने का कोई मौका नहीं छोड़ते। लेकिन जब ऐसे लोगों का अपना ही दामन दागदार हो, तो उनकी बातों में दम नहीं रह जाता। हम बात कर रहे हैं एक ऐसी ही महिला पत्रकार सोनिया चौहान की, जो 2023 में जबरन वसूली, धमकी और मानहानि के एक गंभीर मामले में फंस चुकी है।
उस समय वापी में एक स्पा संचालक ने सोनिया चौहान समेत तीन लोगों के खिलाफ 5 लाख रुपये की जबरन वसूली की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि इन लोगों ने उसके मसाज पार्लर को बदनाम करने की धमकी दी थी और यहां तक कि दुकान में कंडोम रखकर यौन उत्पीड़न के झूठे आरोप लगाने की भी धमकी दी थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि उन्होंने कथित तौर पर ‘मीडिया माफिया’ बनकर 1.80 लाख रुपये की उगाही की थी।
इस मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए इन सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सोनिया चौहान को भी जेल जाना पड़ा था और एक दिन के पुलिस रिमांड के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। खबरों के मुताबिक, वह अग्रिम जमानत हासिल करने में भी असफल रही थी।
आज, वही महिला जो खुद ऐसे गंभीर आरोपों का सामना कर चुकी है, ‘बदनाम करने’ की अपनी पुरानी आदत पर वापस लौट आई है। बिना किसी स्क्रिप्ट की समझ या गहराई के, वह दूसरों पर बेबुनियाद आरोप लगा रही है और उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है। यह बेहद शर्मनाक है कि एक महिला जो खुद कानून की गिरफ्त में आ चुकी है, वह नैतिकता का पाठ पढ़ा रहा है।
सोनिया चौहान को अपने अतीत को याद करना चाहिए। उन्हें उन दिनों को नहीं भूलना चाहिए जब वह खुद जबरन वसूली और धमकी के आरोपों के चलते भारी सुर्खियों में थी। जिस भाषा और तरीकों का इस्तेमाल वह आज कर रही है, वह उसके अपने ही किए गए अपराधों की याद दिलाती है।
यह सिर्फ बदले की भावना से किया गया एक घटिया प्रयास है, जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं। लोगों को ऐसे दागी चरित्र वाले पत्रकारों से सावधान रहना चाहिए, जो अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी को पत्रकारिता का चोला पहनाकर पेश करते हैं। रही बात हमारी तो हमे कानून पर पूरा भरोसा है। और हमे न्याय भी जरूर मिलेगा। इस लिए हमारी चिंता छोड़ कर खुद के चरित्र के बारे मे सोचे।
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